ऑर्गेज्म -सैक्स के दौरान एक औरत के मजे का लेबल



चरमानंद (Orgesm)
फ्री तन - मन से की गई रतिकला (Sex) सुखद परिणाम देती है । ये सही मायने स्त्रीत्व तथा पुरुषत्व के मायने ठीक से बता देती है । सेक्स करते समय महिला की कामोत्तेजना अपने चरम पर पहुंच जाती है तो उस स्थिति ऑर्गेज्म कहते हैं । क्लाइमैक्स महिला के लिए सबसे बड़ी तृप्ति की चरमावस्था है जिसमें महिला को सुखद अहसास होता है सेक्स के दौरान महिला को पूरी तरह संतुष्ट कर पाना पुरूषों के लिए थोड़ा मुश्किल और अधिक मेहनत वाला होता है । हर महिला अपने आप में अलग होती है और हर सेक्शुअल एनकांउटर यूनिक होता है हर स्त्री के ऑर्गेज्म का अनुभव अलग होता है । हर महिला की चरमतृप्ति एक सामान नहीं होती है । सेक्शुअल इंटरकोर्स के दौरान महिला को चरमोत्कर्ष( ऑर्गेज्म)तक ले जाना पुरूषों के लिए बेहद जरूरी होती है । इससे अनेक रिश्तों के बीच सुखद तालमेल बना रहता है वर्ना सहवास के कटु अनुभव रिश्तों को खात्मे की ओर भी ले जा सकते हैं । इसी दौरान महिला पुरुषों की सही ताकत , पौरूष और व्यक्तित्व का मूल्यांकन करती है । ऑर्गेज्म पहुंचने के लिए महिला को संपूर्ण रूप से कामोत्तेजित होना अनिवार्य होता है । लेकिन महिला के लिए उत्तेजित होना उतना आसान नहीं होता है और इसलिए थोड़ा ज्यादा कोशिश करने की जरूरत होती है महिला को उत्तेजित होने में पुरूष तुलना में 5 गुना अधिक समय लगता है और एक बार कामोत्तेजित हो जाने के बाद उसकी कामोत्तेजना  अधिक समय तक यथावत् टिकाऊ होती है , क्योंकि उनका नर्वस सिस्टम इस उत्तेजना को अधिक समय तक हज़म करते रहने में तरह सक्षम होता है । इसी प्रकार पेनिट्रेशन( लिंग योनि में प्रवेश) के बाद पुरूष जहाँ 2-3 मिनट से अधिक टिक पाते और उनका एजाक्युलेशन आनन - फानन ही हो जाता वहीं महिला को आफ्टर पेनिट्रेशन चरमोत्कर्ष तक पहुंचने में 20 मिनट लेकर एक घंटे का समय लग जाता है और क्लाइमैक्स के बाद भी महिला , पुरुष के समान तुरंत ही ढेर नहीं हो जाती बल्कि उनकी कामोत्तेजना काफी समय तक बनी ही रहती है और बहुत ही धीरे - धीरे पर्याप्त समय बाद ही उत्तेजना शांत हो पाती है । महिला ऑर्गेज्म महिलायें एक ही सेशन में कई बार ऑर्गेज्म तक पहुंच सकती हैं । इसलिए क्लाइमैक्स तक पहुंचने के बाद धोड़ी - सी उत्तेजना भी उनको बहुत देर तक उकसा सकती है । महिला के ऑर्गेज्म की स्थिति में उनके मन का बहुत बड़ा योगदान होता है । अगर महिला लगातार उत्तेजित रहे तो एक बार में एक से अधिक ऑर्गेज्म का अनुभव करने में सक्षम होती है । महिला दोबारा चरम सुख का अनुभव करने में बहुत जल्दी सक्षम हो जाती है , जबकि पुरुष नहीं । महिला को पुरूष की तुलना में अधिक समय तक चरम सुख का अनुभव होता है तथा महिला ऑर्गेज्म के कारण शुक्राणु की ओर फेलोपियन ट्यूब के माध्यम से अपने आप खिंचा चला जाता है ।
 महिला अपने तरीके , समय और एक अलग स्थिति में चरमोत्कर्ष का अनुभव करती है । प्रतिक्रिया स्वरूप उनके जननांगों में रक्तप्रवाह और कामोत्तेजना के समय मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाता है और अंततः वेजाइना के निचले हिस्से , यूटेरस और एनस में तालबद्ध संकुचन क्रिया होती है । क्लिटरिस और वेजाइना की संयुक्त उत्तेजना द्वारा ऑर्गेज्म महिला के लिए अधिक स्ट्रांग होता है । सेक्स के दौरान एक सामान्य अवस्था से 17 गुना ज्यादा दर्द बड़ी आसानी से सहन सकती है । अलग - अलग यौन रूझान वाली महिलाओं में चरमोत्कर्ष का स्तर भिन्न होता है । सेक्स के लिए महिला की दामता असीम होती है और हर महिला का ऑर्गेज्म अलग - अलग होता है । इसी प्रकार सेक्स का मतलब भी महिला के लिए अलग - अलग होता और इस बात पर निर्भर करता कि उस अनुभव के दौरान उसे किस प्रकार की उत्तेजना हुई । अलग - अलग संवेदनाओं और परिस्थितियों के अनुरूप महिला के ऑर्गेज्म में बदलाव सामान्य होता है पुरूष ऑर्गेज्म तो सीधा - सा हिसाब - किताब है शुरूआत होती है उत्तेजना और लिंग तनाव से और स्खलन के बाद कहानी खत्म । लेकिन किसी महिला के संबंध में यह इतना आसान नहीं है । महिला की संतुष्टि (satisfaction) का अंदाज़ अलग होता है , वह इमोशनली अधिक जुड़ती है । चरमोत्कर्ष की अवधि पुरुषों और स्त्रियों के लिए अलग - अलग होती है
स्त्रियों के लिए चरमोत्कर्ष औसतन 6-10 सेकंड के बीच रहता है यह 15-20 सेकंड तथा उससे भी अधिक समय तक हो सकता पुरूषों में यह उनकी स्त्री साथी की तुलना में बहुत कम है । यह अधिक अधिक 4-5 सेकंड जितना अल्प समय है औसतन पुरूषों चरमोत्कर्ष तक पहुंचने में 2-3 मिनट लगते हैं और स्त्रियों को लगभग 20 से 30 मिनट या उससे अधिक । बढ़ती उम्र के साथ चरमोत्कर्ष की अवधि कम हो जाती है । जो स्त्री अपने संबंध में कम सुरक्षा महसूस करती है , उनमें चरमोत्कर्ष की भावना बहुत कम होती है । लगभग 75 प्रतिशत स्त्रियों को क्लिटरिस उत्तेजना की आवश्यकता होती और मात्र वेजाइनल पेनिट्रेशन द्वारा चरमोत्कर्ष प्राप्त नहीं कर सकती । एक शोध के अनुसार केवल 20 प्रतिशत पुरुष ही अपनी महिला साथी को ऑर्गेज्म तक पहुंचा पाते हैं और बाकी 80 प्रतिशत महिला सेक्स का आनंद लेकर यूं ही सो जाती हैं । एक पुरुष के लिए ऑर्गेज्म तक पहुंचना बहुत आसान है लेकिन अपनी महिला साथी को पहुंचान , साधना से कम नहीं । निज सुतंष्टि के चलते ऐसा साधक कोई भी नहीं बनना चाहता । एक महिला को चरमोत्कर्ष तक पहुंचने के लिए पुरूष द्वारा दिए जाने वाले फोरप्ले  में अधिक आनंद आता है  जब फोरप्ले अच्छी तरह से ज्यादा वक्त तक किया जाए।अन्य संभोग के मुकाबले महिला को सॉफ्ट सेक्स फोरप्ले जब तक नहीं होगा तब तक महिला को satisfied करना बहुत ही मुश्किल है लेकिन इतना वक्त उसे कोई देना ही नहीं चाहता क्योंकि खुद की संतुष्टि होनी चाहिए और बात खत्म । हर महिला इस अधूरे खेल की अभ्यस्त हो चुकी
होती है । 

हर महिला अपने वैवाहिक जीवन में 50 प्रतिशत से भी कम क्लाइमेक्स तक पहुंच पाती है महिलाओं के लिए कैसा होता है ऑर्गेज्म का अनुभव ? 

• एक छींक जैसा अनुभव , बादलों में तैरने जैसा मुलायम अहसास गर्माहट भरी ताजगी का अनुभव 

• शरीर में एक अजीब तरह की सहजता (comfort) महसूस होती है संतुष्टि के बाद शरीर को राहत मिलती है और शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह तनावमुक्त हो जाता है । इसके बाद महिला का आनंद इतना बढ़ जाता कि महिला को अलग ही दुनिया में पहुंचा देता है । पैरों , जाघों तथा मांसपेशियों में एक मादक गुदगुदी होती है , सब कुछ शांत सा महसूस होता है । 
• स्त्रीत्व की पूर्णता होने का महका सा एहसास महसूस होता है । जैसे शरीर कोई चमत्कारी ऊर्जा पैदा हो गई हो और वह पूरे शरीर को टोन कर हो . प्रत्येक अंग संवेदनशील हो उठता है । 
• का अनुभव होता है शरीर से पसीना आने लगता है । शरीर में एक विचित्र प्रकार की मादक विधुत तरंग दौड़ती है । एक सनसनाहट होती अधिक प्यास लगती है।

• रिक्तता के पूरी तरह भर जाने का एहसास भरे पूरे होने का अनुभव पेट , काफी दबाब का अनुभव होता है और ऑर्गेज्म का सुख मिलने पर पूरा शरीर सुस्त पड़ जाता है तथा इसके बाद अचानक से काफी ऊर्जा की अनुभूति होती है । 

• ऑर्गेज्म के दौरान पूरा शरीर टाइट हो जाता है और शरीर के ऊपर इतना प्रेशर पड़ता है कि पैरों , जांघों में ऐठन - सी महसूस होती वेजाइना के अंदर की मांसपेशियां अपना नियंत्रण खो देती हैं । वेजाइना ऐंठन साथ ही पूरे शरीर में अकड़न का एहसास होता है।

• दिल की धड़कन बेकाबू हो जाती है । सांसें धौंकनी जैसी तेज़ और भारी हो जाती हैं । पूरा शरीर पसीने से तर हो जाता , रक्तचाप (blood pressure) काफी अधिक हो जाता है । स्तन का आकार काफी हो जाता है । निपल्स तन कर कठोर और खड़े हो जाते हैं । नथुने फड़कने लगते हैं । आंखों की पुतलियां फैलने लगती हैं । होठ गोलाई में सिकुड़ने लगते हैं । 
• आंतरिक जांघों तथा पेट के निचले हिस्से में गर्माहट जैसी फीलिंग होती है और मन करता है जैसे यह बनी रहे फिर यह शरीर के पूरे निचले भाग में फैल जाता है और ऐसा महसूस होता है मानो वेजाइना से कोई चीज़ कहीं से बहुत झटके में आ रही हो । यह फीलिंग पूरी तरह से शारीरिक व अंदरूनी होती है और तकरीबन 15-20 सेकंड तक रहती है । 
• ऑर्गेज्म के समय योनिद्वार , भगांकुर , गुदापेशी , गर्भाशय मुख , योनि की आंतरिक पेशियां लय और तालबद्ध रूप में फैलने व सिकुड़ प्रत्येक 0.8 सेकंड के अंतराल पर कभी - कभी ये पांचों 28 गतिशील हो जाती हैं। उस समय आनंद की कोई सीमा नहीं रहता कई बार तक या उससे अधिक पेशियां फैलती - सिकुड़ती रहती हैं । लगातार क्रमबद्ध तरीके से तथा पेनिस पर वेजाइनल ग्रिप बढ़ जाती है । ऐसा भी अनुभव होता है कि यूटेरस एक बार खुलता फिर बंद हो जाता है । संपूर्ण योनिप्रवेश गुदा से लेकर नाभि तक में सुरसुराहट की तरंग उठने लगती हैं और कई बार ये तरंग जांघों तक फैल जाती हैं ऐसा अनुभव होता है मानो वेजाइना के अंदर विद्युत प्रवाहित हो रही हो । वेजाइना के अंदर तीव्र हल - चल का एहसास सुख से सराबोर कर देता है । 

• इसके बाद महिला एकदम शांत हो जाती है और कोई प्रतिक्रिया नहीं करती । 

• इसके बाद कुछ करने का मन नहीं करता , आंखे बंदकर निढाल होकर सोने की इच्छा होती है ।

 • ऑर्गेज्म के समय अधिक उत्तेजना से स्वर्गीय सुख का आनंद अनुभव करना ।

 वेजाइनल स्त्राव की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाने का एहसास , पेल्विक एक्टिविटी पीक पर होना । ऑर्गेज्म पर पहुंचते ही एकाएक अपनी आवाज तेज कर देना फिर अचानक से शांत पड़ जाना । आंखों में जुगनू जैसी चमक का अनुभव करना । शरीर के साथ मन का हल्का हो जाना , तनावमुक्त महसूस करना , संतुष्टि और खुशी का एहसास , चेहरे पर ग्लो का बढ़ना । 
जीवन और दुनिया को देखने , समझने के नजरिए में बदलाव का अनुभव होता है , सबकुछ खूबसूरत , सरस लगता है , विश्वास जागता है , जीना रूचिकर लगता है , उसमें रस दिखाई देता है । 

दुनिया भले ही वैसे ही रहे पर आप वैसे नहीं रह जाते । मन अकारण बेचैन , परेशान , चिंतित नहीं रहता और सम्पूर्ण एवं सार्थक चरम नारीत्व का सुखद एहसास होता है । महिला को पुरूष पार्टनर के प्रति अपनेपन का एहसास , ट्रस्ट व स्ट्रांग बॉन्डिग का अनुभव , सेवा - समर्पण भाव में वृद्धि अधिक केयरिंग भाव में इजाफा होता है ।

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