खजूर, सेहत के लिए वरदान है, ताक़त का पावर हाउस

खजूर

 खजूर एक सस्ता,अतिमधुर और अत्यन्त पौष्टिक गुणों से युक्त मेवा है।  
गुण - खजूर शीतल , मीठा, रस एवं पाक में मधुर रुचिकारक , स्निग्ध , दिल को भारी ,  बलवीर्यवर्दक और घाव, क्षय , रक्तपित्त , कोठे की वायु , वमन , कफ ज्वर ,अतिसार भूख , प्यास, खांसी, सांस, दमा, वातपित्त तथा शराब के सेवन से उत्पन्न हुए रोगों को खतम करने वाला है। गीले फल को खजूर कहते हैं ।बड़े और बहुत गूदे वाले गीले फल से छुहारा बनता है ,यही बड़ा फल सूखने पर छुहारा या खारक कहा जाता है। सूखने पर यह गरम प्रकृति का हो जाता छुहारा के रूप में भी यह बहुत उपयोगी रहता खजूर और छुहारा सारे देश में सभी जगह आसानी से मिल जाता है ।इसकी उपज पंजाब , सिन्ध और पश्चिमी देशों ( अरब , मिस्त्र , सीरिया आदि ) में खासतौर की जाती है । छुहारे के रूप में यह कफ सर्दी और खांसी दूर कर फेफड़ों व छाती को शक्ति देता है। रासायनिक संगठन में इसमें प्रोटीन, फैट,कार्बोहाइड्रेट , मिनरल्स , केल्शियम फास्फोरस आदि के अलावा शर्करा सर्वाधिक मात्रा में पाई जाती है । 
इस्तेमाल - जिनका शरीर दुबला - पतला कमजोर और चेहरा पिचका हुआ हो उन्हें हाजमे के  हिसाब से  सही मात्रा में प्रतिदिन  खाना चाहिए । इससे 1-2 माह में उनका शरीर पुष्ट और सुडौल हो जाएगा और चेहरा भर जाएगा । इसे दूध डाल कर खाएं (या खाकर दूध पिएं) तो और अधिक गुणकारी रहेगा । यह एसिटिडी और शरीर की अतिरिक्त गर्मी को दूर करता है । खून की कमी ,धातु  क्षीणता करने के लिए इसका प्रयोग उत्तम है । इसके सेवन त्वचा चिकनी व चमकदार , चेहरा कान्तिपूर्ण , बाल मजबूत , घने व लम्बे होते हैं त्वचा रंग साफ़ होता है । रक्तविकार , चर्मरोग तथा वातपित्त रोग दूर होते शरीर में बलवीर्य की वृध्दि है तथा यौनशक्ति कायम रहती है । यह बच्चों युवा एवं प्रौढ आयु वालों लिए सेवन है । इसमें मौजूद शर्करा बहुत जल्दी हज़म हो जाती है । 

 पिण्ड खजूर एक सस्ता , अतिमधुर और अत्यन्त पौष्टिक गुणों से युक्त मेवा है।  
गुण - खजूर शीतल , मधुर , रस एवं पाक में मधुर रुचिकारक , स्निग्ध , हृदय को प्रिय भारी , तृप्तिदायक ग्राही , बलवीर्यवर्दक और क्षत ( घाव ) , क्षय , रक्तपित्त , कोठे की वायु , वमन , कफ ज्वर , अतिसार भूख , प्यास , खांसी , श्वास , दमा मूळ , वातपित्त तथा मद्य के सेवन से उत्पन्न हुए रोगों को नष्ट करने वाला है परिचय - यह गीले फल को खजूर कहते हैं । । बड़े और बहुत गूदे वाले गीले फल को  खजूर कहते यही बड़ा फल सूखने पर छुहारा या खारक कहा जाता है सूखने पर यह गरम प्रकृति का हो जाता छुहारा के रूप में भी यह बहुत उपयोगी रहता पिण्ड खजूर और छुहारा सारे देश में सर्वत्र उपलब्ध होता है पर इसकी उपज पंजाब , सिन्ध और पश्चिमी देशों ( अरब , मिस्त्र , सीरिया आदि ) में खासतौर की जाती है । छुहारे के रूप में यह कफ , सर्दी और
खांसी दूर कर फेफड़ों व छाती को शक्ति देता है रासायनिक संगठन में इसमें प्रोटीन , वसा कार्बोहाइड्रेट , खनिज द्रव्य , केल्शियम फास्फोरस आदि के अलावा शर्करा सर्वाधिक मात्रा में पाई जाती है । उपयोग - जिनका शरीर दुबला - पतला कमजोर और चेहरा पिचका हुआ हो उन्हें अपनी पाचन शक्ति के अनुकूत मात्रा में प्रतिदिन पिण्ड खजूर अवश्य खाना चाहिए । इससे 1-2 माह में उनका शरीर पुष्ट और सुडौल हो जाएगा और चेहरा भर जाएगा । इसे दूध डाल कर खाएं ( या खाकर दूध पिएं ) तो और अधिक गुणकारी रहेगा । यह अम्लपित्त ( एसेडिटी ) और शरीर की अतिरिक्त उष्णता को दूर करता है । खून की कमी . धातु दौर्बल्य और क्षीणता करने के लिए इसका प्रयोग उत्तम है । इसके सेवन त्वचा चिकनी व चमकदार , चेहरा कान्तिपूर्ण , बाल मजबूत , घने व लम्बे होते हैं त्वचा रंग साफ़ होता है । रक्तविकार , चर्मरोग तथा वातपित्त रोग दूर होते शरीर में बलवीर्य की वृध्दि है तथा यौनशक्ति कायम रहती है । यह बच्चों युवा एवं प्रौढ आयु वालों लिए सेवन है । इसमें मौजूद शर्करा बहुत जल्दी हज़म हो जाती है । नहीं करती । पिण्डखजूर ज्यादा मात्रा में खाने भारीपन आता है और अपच जाती अतःज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए एक बार में छुहारे भी 3-4 से ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि गर्म तासीर का होता है दो छुहारे काट कर टुकड़े कर लें और सोते समय खूब चबा चबा कर व चूँट पूँट करके दूध पीते रहे या दूध में उबाल खा लें और ऊपर से दूध पी लें । इसके बाद कुनकुने गरम पानी से कुल्ले करके सो जाएँफिर ठण्डा पानी न पिएं । यह प्रयोग 3-4 दिन करने गले की खराश सर्दी जुकाम विकार ठीक होते हैं सुबह के 4 5-6  खजूर खाकर दूध है । जिन्हें बार - बार सर्दी जुकाम होता हो , जुकाम बना रहता हो , नाक बन्द रहती हो उन्हें जुकाम शुरू होने के दो दिन बाद यह प्रयोग करना चाहिए- चार  खजूर गुठली हटाकर पाव भर दूध में डाल लें 4 काली मिर्च और एक बड़ी इलापची कूट कर डालें और आग पर पकाएं । अच्छा उबल जाए तब उतार कर एक चम्मच शुध्द धी डाल लें । पिण्ड् खजूर चबा चबा कर खाएं और घुट घूटकर दूध पी ले व मुंह साफ़ करके सो जाएँ । 4-5 दिन या जरूरत के अनुसार अवधि तक यह प्रयोग करने से सर्दी जुकाम , गले की खराश , नाक बन्द होना आदि की शिकायत दूर हो जाती है । आवश्यकता पड़ने इस प्रयोग को , उपयोग में लेते रहना चाहिश सामान्य रूप से इस पूरे शीतकाल में दो छुहारे या 4-5 पिण्ड खजूर रात को दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करना शरीर को स्वस्थ , मोटा ताज़ा और शक्तिशाली बनाने के लिए उत्तम उपाय है । यह आमाशय हृदय , फेफड़े , गुर्दे और यौन संस्थान को बल देने वाला प्रयोग है । स्वप्नदोषऔर शीघ्रपतन के रोगियों को इस पूरे शीतकात में नियमित रूप से 4-5 पिण्डखजूर दूध के साथ प्रातः नाश्ते के रूप में खाना चाहिए । यह बहुत ही कारगर , सस्ता और आसान घरेलू इलाज है जिससे इन दोनों रोगों को दूर किया जा सकता है । ऐसा रोगी यह प्रयोग रात को सोते समय न करके प्रातः जल्दी नाश्ते के रूप सेवन करें और इसके ढाई - तीन घण्टे बाद भोजन करे ताकि ठीक से हजम हो सके । रात को सोते समय इनका सेवन करना कुछ कारणों से ऐसे रोगियों के लिए उचित नहीं इसलिए इन्हें यह प्रयोग प्रातः करना चाहिए, खजूर ज्यादा मात्रा में खाने भारीपन आता है और अपच जाती । अतःज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए एक बार में छुहारे भी 3-4 से ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि गर्म तासीर का होता है दो छुहारे काट कर टुकड़े कर लें और सोते समय खूब चबा चबा कर व चूँट पूँट करके दूध पीते रहे या दूध में उबाल खा लें और ऊपर से दूध पी लें । इसके बाद कुनकुने गरम पानी से कुल्ले करके सो जाएँ फिर ठण्डा पानी न पिएं । यह प्रयोग 3-4 दिन करने गले की खराश सर्दी जुकाम विकार ठीक होते हैं सुबह के 4 5-6  खजूर खाकर दूध है । जिन्हें बार - बार सर्दी जुकाम होता हो , जुकाम बना रहता हो , नाक बन्द रहती हो उन्हें जुकाम शुरू होने के दो दिन बाद यह प्रयोग करना चाहिए- चार  खजूर गुठली हटाकर पाव भर दूध में डाल लें 4 काली मिर्च और एक बड़ी इलायची 
 पीस कर और आग पर पकाएं अच्छा उबल जाए तब उतार कर एक चम्मच शुध्द धी डाल लें ।खजूर चबा चबा कर खाएं और घूंट घूंट दूध पी ले व मुंह साफ़ करके सो जाएँ । 4-5 दिन या जरूरत के अनुसार अवधि तक यह प्रयोग करने से सर्दी जुकाम , गले की खराश , नाक बन्द होना आदि की शिकायत दूर हो जाती है । आवश्यकता पड़ने इस प्रयोग को , उपयोग में लेते रहना चाहिश सामान्य रूप से इस पूरे शीतकाल में दो छुहारे या 4-5 पिण्ड खजूर रात को दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करना शरीर को स्वस्थ , मोटा ताज़ा और शक्तिशाली बनाने के लिए उत्तम उपाय है । यह आमाशय हृदय , फेफड़े , गुर्दे और यौन संस्थान को बल देने वाला प्रयोग है । स्वप्नदोष और शीघ्रपतन के रोगियों को इस पूरे शीतकात में नियमित रूप से 4-5 पिण्डखजूर दूध के साथ प्रातः नाश्ते के रूप में खाना चाहिए । यह बहुत ही कारगर , सस्ता और आसान घरेलू इलाज है जिससे इन दोनों रोगों को दूर किया जा सकता है । ऐसा रोगी यह प्रयोग रात को सोते समय न करके प्रातः जल्दी नाश्ते के रूप सेवन करें और इसके ढाई - तीन घण्टे बाद भोजन करे ताकि ठीक से हजम हो सके । रात को सोते समय इनका सेवन करना कुछ कारणों से ऐसे रोगियों के लिए उचित नहीं इसलिए इन्हें यह प्रयोग प्रातः करना चाहिए।

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