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सिंघाड़ा -बेजोड़ फल

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सिंघाड़ा यूं तो सिंघाड़ा एक साधारण और सस्ता सा फल जो बहुत कम सेवन किया जाता है। लेकिन गुण लाभ की दृष्टि से यह सस्ता होते हुए बहुत गुणकारी फल है । इस उपेक्षित फल विषय में परिचय प्रस्तुत करके हम आपको एक फल से परिचित करा रहे हैं जो सस्ता होते हुए आपको पौष्टिकता प्रदान करने में सक्षम है ।यह शीतल , स्वादिष्ट , भारी , पोषक व वीर्यवर्द्धक , कसैला , ग्राही , वीर्य वात तथा कफ बढ़ाने वाला तथा पित्त , रक्तविकार और जलन को करने वाला है।  सिंघाडा रक्तपित्तनाशक , कामोद्दीपक , त्रिदोषनाशक , ताप निवारक , लिंग को दृढ़ करने वाला और रुचिकारक होता है ।  आयुर्वेद के अनुसार सिंघाड़ा अत्यन्त कमोद्दीपक , मलरोधक , वीर्यवर्द्धक , लिंग को कठोर करने वाला , वात और कफ बढ़ाने वाला कसैला , मधुर , शीतल , स्वादिष्ट , तृप्तिदायक पित्त तथा दाहनाशक और त्रिदोष , प्रमेह , रक्तविकार , भ्रमसूजन तथा सन्ताप को नष्ट करने वाला है । सिंघाड़ा तालाबों में पैदा होता है और इसके पत्ते पानी की सतह पर तैरते रहते हैं ।  इसका शरीर तिकोने आकार का होता है और कोने कांटेदार होते हैं । कच्ची हालत में हरा और पकने पर काला...