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मूली - बवासीर का इलाज चुटकियों में

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मूली मूली बहुत गुणकारी और उपयोगी होती है । यहां मूली के गुण एवं उपयोग के विषय में विवरण किया जा रहा है । प्रायः मूली को साधारण वस्तु समझा जाता इसलिए इसका उपयोग यदाकदा सलाद के रूप में कर लिया जाता है । मूली का उपयोग खाद्य व्यंजन में तो किया जाता है साथ ही इसका प्रयोग इलाज औषधि के रूप में भी किया जा सकता है इसका अचार बहुत स्वादिष्ट और गुणकारी होता है । गुण- मूली चरपरी गरम , रुचिकारक , हलकी पाचक , त्रिदोषनाशक स्वर को उत्तम करने वाली तथा ज्वर , श्वास कष्ट , नासिका , कण्ठ रोग तथा नेत्र रोग नाशक है । यह छोटी मूली के गुण बड़ी मूली के गुण भी ऐसे ही होते सिर्फ एक फर्क होता है कि बड़ी मूली पचने में हलकी नहीं , भारी होती है । मूली उष्णवीर्य और तिक्तरस वाली होती है , तीखी , सारक , कृमिनाशक(पेट के कीड़ों को खत्म) और अग्निवर्द्धक होती है । खाने को हजम कर देती और खुद देर हजम होती है । मूत्र विकार और उदर विकार करती है । परिचय - पह छोटी  व बड़ी , दो प्रकार की होती है और सारे भारत में पाई जाती है अतः इसका परिचय देना जरूरी नहीं । उपयोग - मूली का ज्यादातर उपयोग सलाद के साथ कच्चे रूप में कि...