ऊँट
ऊँट
"क्या ये लोग ऊँटों को नहीं देखते के इन्हें कैसे पैदा किया गया? और आसमान कैसे बुलंद किया गया? और पहाड़ों को किस तरह गाडा गया? और ज़मीन को कैसे बिछाया गया?"
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सूरेह ग़ाशिया, अल क़ुरआन
क़ुरआन के इन अल्फाज़ो में इंसान को ग़ौर ओ फ़िक्र की दावत दी गयी है, ऊंट की बनावट पर ग़ौर करने पर ये बात पता चलती है के ऊंट का ज़िक्र बेवजह नहीं किया गया। इस जानवर में भी क़ुदरत की अजीब दलीलें मौजूद है।
ऊँट की कुहान सबसे अलग होती है। दुसरे जानवरों में कुहान जिस्म के अगले हिस्से में होती है लेकिन ऊँट की कुहान पीठ के बिच में होती है। कुछ ऊँट दो कुहानों वाले भी होते हैं, जो दुसरे जानवरों की तुलना में सहराओं में ख़ुद को ज़्यादा एक्टिव और ज़िंदा रखने में मददगार होते है।सहराओं में गरम तरीन इलाक़ों में काम करना ऊँटों की ख़ास पहचान है। इसके बोझ उठाने की सलाहियत घोड़े बल्कि हाथी से भी ज़्यादा है। बोझ उठाने में कोई दुसरा हैवान इनका मुक़ाबला नहीं कर सकता। एक हाथी अगर 2900 किलोग्राम का हो तो वो ज़्यादा से ज़्यादा 580 किलोग्राम वज़न उठा सकता है। एक घोडा 350 किलो का हो तो वो सिर्फ 55 किलो या उससे कुछ ज़्यादा ही वज़न उठा पाता है। दुसरे जानवरों पर सिर्फ उसी वक़्त बोझ लाद सकते हैं जब वो खड़े होते है। बैठने की हालत में ना तो इनपर सवार हुआ जा सकता है ना वज़न लादा जा सकता है। जबकि ऊँट पर आप बैठने की हालत में भी बोझ लाद सकते है और सवार होसकते है। दुसरे चौपाये जैसे गाय,भैंस वगैरेह जब चलते है तो उनकी जब अगली बायीं टांग उठती तब उनकी पिछली दायीं टांग उठती है, इस तरह इनका तवाजुन अगली बायीं और पिछले दायीं टांग पर टिका रहता है। ऊँट इस मामले में भी अलग है इसकी अगली दायीं और पिछली बायीं टांग बयक वक़्त उठती है। इसके अलावा भैंस ,गाय वैगेरह पिछले टाँगे ज़्यादा ताक़त से चला सकते है, आगे की टाँगे नहीं चला सकते। ऊँट की खासियत ये है की ये आगे, पीछे की टांगों को एक ही ताक़त के साथ हरकत दे सकता है।इसलिए इसकी टाँगे जिस्म के निचे तरफ मुड सकती है, जब वो बैठता है इसका जिस्म ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठा रहता है और सीधा होता है। जबकि गाय,भैंस वगेरह करवट पे बैठते है और सीधे नहीं बैठ सकते। ऊँट बिना खाए पिये एक लंबे अरसे तक इंसान की ख़िदमत अंजाम देता है।
ऊँट का ऊपर का होंठ बिच से कटा हुआ होता है यानी दो हिस्सों में बटा हुआ होता है और ख़ास बात ये है के ये होंठों के दोनों हिस्सों को ऊपर निचे हरकत दे सकता है। रेगिस्तान इलाक़ों में दूर दूर तक कोई पेड़,पौदे नहीं होते अगर होते हैं तो काँटेदार झाड़ियाँ होती है। ऊँट के कटे हुवे होंठों का फायेदा ये होता है ये काँटों से महफूज़ रहता है। इसके अलावा इसके होंठों पर एक गद्दी नुमा खाल होती है जिसपर छोटे छोटे बाल होते है, इसकी मदद से ये होंठों को काँटों से महफूज़ रखता है। वो कटे हुवे होंठों से अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ पत्तों और टहनियों को पकड़ता और हटाने का काम लेता है। दुसरे जानवरों में ज़िराफ ऐसा जानवर है जिसकी गर्दन ऊँट से भी ज़्यादा लंबी होती है लेकिन सख्त रेगिस्तान में वो ऊँट की तरह ज़्यादा देर तक ज़िंदा नहीं रह सकता। ना ज़िराफ इंसान से दोस्ती बना सकता है और ना उससे बोझ उठाने का काम लिया जा सकता है। ऊँट को इंसान की ख़िदमत केलिए ही बनाया है इसी कारण एक छोटा सा बच्चा भी इसकी रस्सी पकड कर इसे जहाँ चाहे लेजाता है। आप इसपर सवार होना चाहें तो वो अपनी लंबी गर्दन आगे झुका देता है ताकि आप इसे सीढियां बनाकर इसकी पीठ पर सवार होसके। रेगिस्तान में जब रेट का तूफ़ान आता है तो उसकी शिद्दत इतनी होती है की रेट का एक पहाड़ दूसरी तरफ शिफ्ट होजाता है। छोटे क़द इ जानवरों का तो रेत में दबकर ज़िंदा रहना ही मुश्किल होता है। ऊँट इस रेतीले तूफ़ान से लड़ने में भी अपनी मिसाल आप है। तूफ़ान में इसका जिस्म जब रेट में दब जाता है तो इसकी गर्दन लंबी होने की वजह से इसका सर रेट से बाहर रहता है। ऊँट आपस में लड़ाई में एक दुसरे को गर्दन से ही गिराने की कोशिश करते है।
ऊँट के पानी पीने की रफ़्तार और सलाहियत इन्तेहाई हैरत अंगेज़ है। वो अपने जिस्म के वज़न के तिहाई हिस्से के बराबर पानी पीता है और इसके पानी पीने की रफ़्तार 10 से 27 लीटर प्रति मिनट है। इसका मतलब ये हुआ के वो 1.5 लीटर पानी की 7 से 18 बोतल एक सांस में पीता है। ये रफ्तार ऊँट की लंबी नाक की वजह से संभव है। क्यूंकि इसको पानी पीने के दौरान साँस लेने में कोई दिक्क़त पेश नहीं आती। ये एक वक़्त में 106 लीटर पानी पीने की क्षमता रखता है। दुसरे चौपाये ना ही इतनी रफ्तार से पानी पी सकते हैं ना जमा कर सकते हैं। आँखें हर जानदार का बड़ा ही नाज़ुक हिस्सा होती है। इनकी हिफाज़त का क़ुदरत ने ये इंतज़ाम किया है के इनके खोपड़ी के आगे की हड्डी आँखों के आगे छज्जे का काम करती है। ऊँट के आँख के अंदर एक बारीक और साफ़ झिल्ली होती है जो रेत के तूफ़ान में आँखों को ढांप लेती है और सबसे हैरत की बात ये है के ऊँट इस बंद झिल्ली के अंदर से भी देख सकता है।आँख को गर्म और ख़ुश्क मौसम में नमी की ज़रूरत होती है वरना आँख ख़ुश्क होकर सूखने का अंदेशा होसकता है इसलिए रब्बे कायनात ने ऊँट की आँख में नमी का सिस्टम भी ख़ुसूसी तौर पर बनाया है। ऊँट की नाक भी कुछ कम हैरतनाक नहीं है..इसकी नाक लंबी होती है और इसके नथनो में बंद होने और खोलने की सलाहियत होती है। नाक की लंबी नाली का फायेदा ये होता है के गर्म हवा की बड़ी मिकदार को नथने बंद करके क़ैद किया जा सकता है।जिससे गर्म हवा के टेम्परेचर को कम किया जासकता है। इसके नाक के नथने सामने की तरफ सीधे नहीं होते बल्कि तिरछे होते हैं इसलिए खुले नथनों में भी रेत डायरेक्ट दाख़िल नहीं होसकती। ऊँट के चौंतीस दांत होते हैं ऊपर के जबड़े में कतरने वाले दांत नहीं होते। इसके दांत लगातार बढ़ते रहते हैं इसलिए वो इनको मुसलसल रगड़ता रहता है ताकि एक ख़ास हद से आगे ना बढे। ऊँट के दूध को प्रेसेर्वे नहीं किया जा सकता। कैंसर जैसी बिमारी को कण्ट्रोल और दूर करने में इसका दूध फायेदेमंद साबित होसकता है।
रब्बे कायनात ने ऊँट को ऐसी ख़ासियतों से नवाज़ा है जो इसे दूसरे जानवरों से जुदा करती है इसलिए इसकी बनावट पर इंसानों से ग़ौर ओ फ़िक्र करने का हुक्म दिया है।
"क्या ये लोग ऊँटों को नहीं देखते के इन्हें कैसे पैदा किया गया? और आसमान कैसे बुलंद किया गया? और पहाड़ों को किस तरह गाडा गया? और ज़मीन को कैसे बिछाया गया?"
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सूरेह ग़ाशिया, अल क़ुरआन
क़ुरआन के इन अल्फाज़ो में इंसान को ग़ौर ओ फ़िक्र की दावत दी गयी है, ऊंट की बनावट पर ग़ौर करने पर ये बात पता चलती है के ऊंट का ज़िक्र बेवजह नहीं किया गया। इस जानवर में भी क़ुदरत की अजीब दलीलें मौजूद है।
ऊँट की कुहान सबसे अलग होती है। दुसरे जानवरों में कुहान जिस्म के अगले हिस्से में होती है लेकिन ऊँट की कुहान पीठ के बिच में होती है। कुछ ऊँट दो कुहानों वाले भी होते हैं, जो दुसरे जानवरों की तुलना में सहराओं में ख़ुद को ज़्यादा एक्टिव और ज़िंदा रखने में मददगार होते है।सहराओं में गरम तरीन इलाक़ों में काम करना ऊँटों की ख़ास पहचान है। इसके बोझ उठाने की सलाहियत घोड़े बल्कि हाथी से भी ज़्यादा है। बोझ उठाने में कोई दुसरा हैवान इनका मुक़ाबला नहीं कर सकता। एक हाथी अगर 2900 किलोग्राम का हो तो वो ज़्यादा से ज़्यादा 580 किलोग्राम वज़न उठा सकता है। एक घोडा 350 किलो का हो तो वो सिर्फ 55 किलो या उससे कुछ ज़्यादा ही वज़न उठा पाता है। दुसरे जानवरों पर सिर्फ उसी वक़्त बोझ लाद सकते हैं जब वो खड़े होते है। बैठने की हालत में ना तो इनपर सवार हुआ जा सकता है ना वज़न लादा जा सकता है। जबकि ऊँट पर आप बैठने की हालत में भी बोझ लाद सकते है और सवार होसकते है। दुसरे चौपाये जैसे गाय,भैंस वगैरेह जब चलते है तो उनकी जब अगली बायीं टांग उठती तब उनकी पिछली दायीं टांग उठती है, इस तरह इनका तवाजुन अगली बायीं और पिछले दायीं टांग पर टिका रहता है। ऊँट इस मामले में भी अलग है इसकी अगली दायीं और पिछली बायीं टांग बयक वक़्त उठती है। इसके अलावा भैंस ,गाय वैगेरह पिछले टाँगे ज़्यादा ताक़त से चला सकते है, आगे की टाँगे नहीं चला सकते। ऊँट की खासियत ये है की ये आगे, पीछे की टांगों को एक ही ताक़त के साथ हरकत दे सकता है।इसलिए इसकी टाँगे जिस्म के निचे तरफ मुड सकती है, जब वो बैठता है इसका जिस्म ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठा रहता है और सीधा होता है। जबकि गाय,भैंस वगेरह करवट पे बैठते है और सीधे नहीं बैठ सकते। ऊँट बिना खाए पिये एक लंबे अरसे तक इंसान की ख़िदमत अंजाम देता है।
ऊँट का ऊपर का होंठ बिच से कटा हुआ होता है यानी दो हिस्सों में बटा हुआ होता है और ख़ास बात ये है के ये होंठों के दोनों हिस्सों को ऊपर निचे हरकत दे सकता है। रेगिस्तान इलाक़ों में दूर दूर तक कोई पेड़,पौदे नहीं होते अगर होते हैं तो काँटेदार झाड़ियाँ होती है। ऊँट के कटे हुवे होंठों का फायेदा ये होता है ये काँटों से महफूज़ रहता है। इसके अलावा इसके होंठों पर एक गद्दी नुमा खाल होती है जिसपर छोटे छोटे बाल होते है, इसकी मदद से ये होंठों को काँटों से महफूज़ रखता है। वो कटे हुवे होंठों से अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ पत्तों और टहनियों को पकड़ता और हटाने का काम लेता है। दुसरे जानवरों में ज़िराफ ऐसा जानवर है जिसकी गर्दन ऊँट से भी ज़्यादा लंबी होती है लेकिन सख्त रेगिस्तान में वो ऊँट की तरह ज़्यादा देर तक ज़िंदा नहीं रह सकता। ना ज़िराफ इंसान से दोस्ती बना सकता है और ना उससे बोझ उठाने का काम लिया जा सकता है। ऊँट को इंसान की ख़िदमत केलिए ही बनाया है इसी कारण एक छोटा सा बच्चा भी इसकी रस्सी पकड कर इसे जहाँ चाहे लेजाता है। आप इसपर सवार होना चाहें तो वो अपनी लंबी गर्दन आगे झुका देता है ताकि आप इसे सीढियां बनाकर इसकी पीठ पर सवार होसके। रेगिस्तान में जब रेट का तूफ़ान आता है तो उसकी शिद्दत इतनी होती है की रेट का एक पहाड़ दूसरी तरफ शिफ्ट होजाता है। छोटे क़द इ जानवरों का तो रेत में दबकर ज़िंदा रहना ही मुश्किल होता है। ऊँट इस रेतीले तूफ़ान से लड़ने में भी अपनी मिसाल आप है। तूफ़ान में इसका जिस्म जब रेट में दब जाता है तो इसकी गर्दन लंबी होने की वजह से इसका सर रेट से बाहर रहता है। ऊँट आपस में लड़ाई में एक दुसरे को गर्दन से ही गिराने की कोशिश करते है।
ऊँट के पानी पीने की रफ़्तार और सलाहियत इन्तेहाई हैरत अंगेज़ है। वो अपने जिस्म के वज़न के तिहाई हिस्से के बराबर पानी पीता है और इसके पानी पीने की रफ़्तार 10 से 27 लीटर प्रति मिनट है। इसका मतलब ये हुआ के वो 1.5 लीटर पानी की 7 से 18 बोतल एक सांस में पीता है। ये रफ्तार ऊँट की लंबी नाक की वजह से संभव है। क्यूंकि इसको पानी पीने के दौरान साँस लेने में कोई दिक्क़त पेश नहीं आती। ये एक वक़्त में 106 लीटर पानी पीने की क्षमता रखता है। दुसरे चौपाये ना ही इतनी रफ्तार से पानी पी सकते हैं ना जमा कर सकते हैं। आँखें हर जानदार का बड़ा ही नाज़ुक हिस्सा होती है। इनकी हिफाज़त का क़ुदरत ने ये इंतज़ाम किया है के इनके खोपड़ी के आगे की हड्डी आँखों के आगे छज्जे का काम करती है। ऊँट के आँख के अंदर एक बारीक और साफ़ झिल्ली होती है जो रेत के तूफ़ान में आँखों को ढांप लेती है और सबसे हैरत की बात ये है के ऊँट इस बंद झिल्ली के अंदर से भी देख सकता है।आँख को गर्म और ख़ुश्क मौसम में नमी की ज़रूरत होती है वरना आँख ख़ुश्क होकर सूखने का अंदेशा होसकता है इसलिए रब्बे कायनात ने ऊँट की आँख में नमी का सिस्टम भी ख़ुसूसी तौर पर बनाया है। ऊँट की नाक भी कुछ कम हैरतनाक नहीं है..इसकी नाक लंबी होती है और इसके नथनो में बंद होने और खोलने की सलाहियत होती है। नाक की लंबी नाली का फायेदा ये होता है के गर्म हवा की बड़ी मिकदार को नथने बंद करके क़ैद किया जा सकता है।जिससे गर्म हवा के टेम्परेचर को कम किया जासकता है। इसके नाक के नथने सामने की तरफ सीधे नहीं होते बल्कि तिरछे होते हैं इसलिए खुले नथनों में भी रेत डायरेक्ट दाख़िल नहीं होसकती। ऊँट के चौंतीस दांत होते हैं ऊपर के जबड़े में कतरने वाले दांत नहीं होते। इसके दांत लगातार बढ़ते रहते हैं इसलिए वो इनको मुसलसल रगड़ता रहता है ताकि एक ख़ास हद से आगे ना बढे। ऊँट के दूध को प्रेसेर्वे नहीं किया जा सकता। कैंसर जैसी बिमारी को कण्ट्रोल और दूर करने में इसका दूध फायेदेमंद साबित होसकता है।
रब्बे कायनात ने ऊँट को ऐसी ख़ासियतों से नवाज़ा है जो इसे दूसरे जानवरों से जुदा करती है इसलिए इसकी बनावट पर इंसानों से ग़ौर ओ फ़िक्र करने का हुक्म दिया है।

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