गद्दार का हाल


ये महल जिसके खण्डरात की तस्वीर आप देख रहे हैं ,आज से तीन सौ साल पहले ये बेहद  खूबसूरत और बड़ा महल हुआ करता था लेकिन जैसे ही इस महल का मालिक मरा इसके बाद किसी ने इस महल में आबाद होने की कोशिश न कि ,लोगों को इस महल से बहुत ज्यादा नफरत थी ,
और तीन सौ साल गुजरने का बाद भी इस महल या इस महल के मालिक के लिए लोगों के दिलों से नफरत कम न हुई , इंसानों की तारीख़ में ये पहली इमारत है जिससे नफरत भरी निगाह से देखी जाती है ,
तारीख़ ने जिस तरह इसे याद रखा उस्से ये साबित होता है के गद्दारी एक ऐसा जुर्म जिसे दुनिया कभी माफ नहीं करती ,
और मजे की बात ये है कि इस गद्दार शख्स ने जिन लोगों के लिए अपनी क़ौम अपने मुल्क से गद्दारी की उन्ही लोगों ने इसे तारीख़ का सबसे बड़ा गद्दार क़रार दिया ,उसके महल को गद्दार महल का नाम दिया ।
पता है वो शख्स कौन था  वो शख्स "मीर जाफर" था और उसका ये खण्डर नुमा महल आज भी पक्षिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के मक़ाम पर है ,
गद्दार गद्दारी कर जाते हैं, लेकिन तारीख उन्हें माफ़ नहीं करती , उनको इबरत का निशान बना दिया जाता है!!!

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