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नवंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ऊँट

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  ऊँट "क्या ये लोग ऊँटों को नहीं देखते के इन्हें कैसे पैदा किया गया? और आसमान कैसे बुलंद किया गया? और पहाड़ों को किस तरह गाडा गया? और ज़मीन को कैसे बिछाया गया?" ~ सूरेह ग़ाशिया, अल क़ुरआन क़ुरआन के इन अल्फाज़ो में इंसान को ग़ौर ओ फ़िक्र की दावत दी गयी है, ऊंट की बनावट पर ग़ौर करने पर ये बात पता चलती है के ऊंट का ज़िक्र बेवजह नहीं किया गया। इस जानवर में भी क़ुदरत की अजीब दलीलें मौजूद है। ऊँट की कुहान सबसे अलग होती है। दुसरे जानवरों में कुहान जिस्म के अगले हिस्से में होती है लेकिन ऊँट की कुहान पीठ के बिच में होती है। कुछ ऊँट दो कुहानों वाले भी होते हैं, जो दुसरे जानवरों की तुलना में सहराओं में ख़ुद को ज़्यादा एक्टिव और ज़िंदा रखने में मददगार होते है।सहराओं में गरम तरीन इलाक़ों में काम करना ऊँटों की ख़ास पहचान है। इसके बोझ उठाने की सलाहियत घोड़े बल्कि हाथी से भी ज़्यादा है। बोझ उठाने में कोई दुसरा हैवान इनका मुक़ाबला नहीं कर सकता। एक हाथी अगर 2900 किलोग्राम का हो तो वो ज़्यादा से ज़्यादा 580 किलोग्राम वज़न उठा सकता है। एक घोडा 350 किलो का हो तो वो सिर्फ 55 किलो या उससे कुछ ज़्यादा ही वज़न उठा पाता ह...

सारे जहां से अच्छा

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“सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा, हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसितां हमारा” ये तराना पूरे भारत का अघोषित कौमी तराना है। इस तराने को लिखने वाले थे Sir Allama Muhammad Iqbal – محمد اقبال علامہ – अल्लामा मोहम्मद इक़बाल आज के दिन मोहम्मद अल्लामा इकबाल 9 नवंबर, 1877 को तत्कालीन भारत के स्यालकोट में पैदा हुए। उनके पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे, लेकिन करीब तीन सौ साल पहले उन्होंने इस्लाम कुबूल कर लिया था और कश्मीर से पंजाब जाकर बस गये थे। उनके पिता शे़ख नूर मुहम्मद कारोबारी थे। इकबाल की शुरुआती तालीम मदरसे में हुई। बाद में उन्होंने मिशनरी स्कूल से प्राइमरी स्तर की शिक्षा शुरू की। लाहौर से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अध्यापन कार्य भी किया। 1905 में दर्शनशास्त्र की उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए इंग्लैंड चले गये। उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल की। इसके बाद वह ईरान चले गये, जहां से लौटकर उन्होंने “द डेवलपमेंट ऑफ मेटाफिजिक्स इन पर्शियन” नामक एक किताब भी लिखी। इसी को आधार बनाकर बाद में जर्मनी के म्युनिख विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि दी। इकब...

किचेन में ही मिलेगा दमा से लेकर कैन्सर तक का इलाज

✴️✴️ किचन में ही मिलेगा 'दमा से लेकर कैंसर' का इलाज ✴️✴️ ➡️जानिये ⭕️जुकाम, दर्द जैसी छोटी-छोटी समस्याएं या ब्रोंकाइटिंस, डायबिटीज और कैंसर जैसे रोग, अगर आप हर दिक्कत पर दवा खाने से बचना चाहते हैं तो इनका इलाज अपने किचन में रखे मसालों में खोज सकते हैं। आइए जानें, आपके किचन में रखे मसाले, आपकी किन समस्याओं का समाधान हैं। ⭕️जीरा कई शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि जीरा के सेवन से कैंसर का रिस्क कम होता है। जीरा में ऐसे एन्जाइम्स हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं जिससे कोशिकाएं ट्यूमर नहीं बना पाती हैं। ⭕️हींग हींग न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं के लिए भी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसके अलावा यह दमा, कफ और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं के उपचार में बेहद मददगार है। मासिक चक्र के दौरान दर्द से आराम दिलाने के लिए यह बेहतरीन पेनकिलर है। ⭕️अदरक सिर्फ जुकाम ही नहीं बल्कि वजन घटाने और पाचन ठीक रखने में भी अदरक बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान कमजोरी या मिचली को दूर करने में भी यह बेहद फायदेमंद है। ⭕️लहसुन लहसुन दिल के रो...

☢️☢️ वायु प्रदूषण कैसे बचें

       ♦️♦️ क्या आप जानते हैं. .?♦️♦️ हम वायु प्रदूषण के जाल में फंस चुके है, जन स्वास्थ्य खतरे में है और हमारे स्वास्थ्य के ऊपर सैकड़ो सवाल उठ चुके हैं और ये राष्ट्रव्यापी समस...

वीर्य गाढ़ा होने तक,सैक्स पावर बढ़ाने का फॉर्मूला

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   ✳️ मर्दानगी वापस कैसे पाएं..? ✳️ ⭕️ रोज सुबह सवेरे नाश्‍ते में एक ग्‍लास टमाटर के रस में एक दो चम्‍मच शहद मिलाकर पीने से ताकत बढ़ती है। ⭕️यौन शक्ति बढ़ाने के लिए रोजाना सौ ग्राम छुहारे दूध के साथ खाएं। ⭕️ दस-पन्‍द्रह मुनक्‍कों को पानी में धो कर दूध में उबालें। इससे वह फूल कर मीठे हो जाएंगे। आप इन्‍हें खाकर ऊपर से वही दूध पी लें। यौन शक्ति में इजाफा होगा। ⭕️लहसुन को यौन शक्ति बढ़ाने और सेक्‍स संबंधी कमजोरी दूर करने के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है। लहसुन की दो-तीन कलियां कच्‍ची ही खाने से यौन क्षमता बढ़ती है। ⭕️ कूटे हुए छुहारे, पिस्‍ता, बादाम व बेल फल के बीज को समान मात्रा में मिलाकर खाने से पुरूषों की यौन क्षमता बढ़ती है। ⭕️सर्दी का मौसम हो तो सुबह दो-तीन खजूर घी में भूनकर नियमित रूप से खाने से भी ताकत में इजाफा होता है। ⭕️प्‍याज का रस यौन शक्ति बढ़ाने का कारगर उपाय है। विशेषकर सफेद प्‍याज (जोकि आमतौर पर बाजार में मिलती नहीं है। इसलिए जब भी आपको बाजार में सफेद प्‍याज दिखाई दे, तो तुरंत खरीद लें)। आप रोज प्‍याज का रस पी‍एं। रस पीना रोज संभव न हो तो कच्‍च...

गुड़

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गुड़ 1. गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत.! 2. खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी रह सकते हैं.! 3. पाचन क्रिया को सही रखना.! 4. गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं.! 5. गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है.! इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है.! 6. त्वचा के लिए - गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है।. 7. गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। 8. एनर्जी के लिए बहुत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जा...

बाज़

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बाज़ बाज़ (ईगल) मादा के बच्चों का जब उड़ना सिखने का वक़्त आता है तब उनकी माँ उनको उठाकर दस हज़ार फीट की बुलंदी पर ले जाती है और फिर वहां से नीचे ज़मीन की तरफ फेंक देती है बच्चा निचे गिरना शुरू होता है। अपने नन्हे पर फड़फड़ाकर अपने आपको बचाने और उड़ने की कोशिश करता रहता है मगर दस हज़ार फीट की बुलंदी पर उड़ना बच्चों का खेल नहीं है दुनिया में सिर्फ ये एक ही परिंदा है जो इतनी बुलंदी पर उड़ता है। किसी दुसरे परिंदे की मजाल ही नहीं जो इस बुलंदी को छू सके। वो बच्चा तेज़ी से नज़दीक आती ज़मीन को देखकर सहेम जाता है,अपने परों को और तेज़ी से मारता देता है, अपनी आख़री कोशिश करता है फिर  फिजा में अपनी नजरें घुमाकर माँ को ढूंड ने की कोशिश करता है मगर उसकी माँ कहीं नज़र नहीं आती, जो करना है ख़ुद ही करना है बचना है तो उड़ना है वरना मरना है, बच्चा अपनी कोशिश जारी रखता है मगर कामयाबी नहीं मिलती यहाँ तक की ज़मीन करीब पहुँच जाती है उसके ज़मीन से टकराने और पाश पाश होने में बस कुछ ही लम्हे बाक़ी होते है,वो अपनी आँखें बंद कर लेता है उसे इतने में अपने नज़दीक दो परों की फड़फड़ाहत सुनाई देती है उसे महसूस होता है किसी ने उसे अपने पंज...

चटनी का मज़ा लेने लगी

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रोटी और चटनी 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 प्राकृतिक स्वाद एवं पोषणयुक्त रोटी तथा स्वादिष्ट चटनियां 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 🌱आटा अम्लीय होता है,, मात्र चोकर वाला अंश क्षारीय होता है। । मानवीय स्वास्थ्य के लिए रोटी को प्राकृतिक गुणों से भरपूर बनाने का तरीक़ा यह है कि रोटी बनाने वाले आटे में शाक सब्जियों को पीसकर या उनका रस मिलाकर रोटी बनाएं। । यहां पर कुछ तरीके प्रयोग के तौर पर दिए गए हैं-- 🍀 (1) मूली की रोटी-- मूली को कसकर आटे में मिला दें,, स्वादानुसार सेंधा नमक,, काली मिर्च,, अजवायन,, जीरा,, हल्दी मिलाकर आटा गूंथकर आधे घंटे बाद रोटी बना लें। ।              लाभ-- बवासीर,, कब्ज दूर करता है। । लीवर को बल मिलता है। । *🌴(2) बथुआ की रोटी-- बथुआ की पत्तियों को धोकर,, पीसकर आटे में मिलाकर रोटी बनाएं। । स्वादानुसार क्र0 1 के अनुसार खाद्य मसाले डालें। ।            लाभ-- रक्तवृद्धि,, रक्तशुद्धि,, वात दोश नाशक,, जीवनीशक्ति वर्द्धक। । *☘(3) पालक की रोटी-- पालक के पत्ते धो...

Miswak,मिस्वाक क्यूँ इस्तेमाल करें? दांतों की सुरक्षा, देखभाल

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पीलू या मिसवाक एक वृक्ष है। इसकी टहनियों की दातून मुस्लिम संस्कृति में बहुत प्रचलित है। मिस्वाक की लकड़ी में नमक और खास क़िस्म का रेजिन पाया है जो दाँतों में चमक पैदा करता है। मिसवाक करने से जब इस की एक तह दाँतों पर जम जाती है तो कीड़े आदि से दन्त सुरक्षित रहतें हैं। इस प्रकार चिकित्सकीय दृष्टि से मिस्वाक दाँतों के लिए बहुत लाभदायक है। मिसवाक (सिवाक, सिवक, अरबी: سواك या مسواك) एक दांत साफ़ करने वाली टहनी है जो सल्वादोरो या पीलू के पेड़ से ली गयी है। आधुनिक टूथब्रश के लिए एक पारंपरिक और प्राकृतिक विकल्प, इसका इतिहास लंबा और अच्छी तरह से प्रलेखित है और इसके औषधीय लाभों के लिए प्रतिष्ठित है। इसके 7000 साल पहले से इस्तेमाल किये जाने के प्रमाण हैं।इस के गुण और औषधीय संपत्तियों को इस प्रकार वर्णित किया गया है: उनके जीवाणुरोधी गतिविधि के अलावा जो दाँतों गठन के प्रकार और गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, उन्हें दांतों की सफाई के लिए एक प्राकृतिक टूथब्रश के रूप में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह टहनियां प्रभावी, सस्ती, आम, उपलब्ध हैं, और कई चिकित्सा गुण रखती हैं...

राई

● राई के अदभुत फायदे ● ●जानकर आप भी दंग रह जाएंगे● आमतौर पर हमारे घरों में राई का प्रयोग अचार बनाने या फिर कुछ सब्ज‍ियों और सांभर में तड़का लगाने के लिए किया जाता है। हम इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन होने वाले फायदों के बारे में बहुत कुछ पता नहीं होता है। राई के इस्तेमाल से कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। ■ राई के फायदे ■ 1. अधिक घबराहट होने पर राई को पीसकर प्रयोग में लाना बहुत फायदेमंद रहेगा। राई को पीसकर हाथ और पैर पर मलने से घबराहट कम होती है और राहत मिलती है। 2. राई में मायरोसीन, सिनिग्रिन जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये दोनों ही चीजें स्क‍िन के लिए बहुत फायदेमंद हैं। रोजाना राई के पानी से चेहरा धोने पर चेहरे की रंगत निखरती है और मॉइश्चर भी बना रहता है। 3. राई में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है। अगर चोट लग जाए या फिर कांटा चुभ जाए तो राई को पीसकर उसमें शहद मिला लें। इस लेप को घाव पर लगाने से जख्म जल्दी भरता है और मवाद भी नहीं बनता। 4. अगर बाल बहुत अधिक गिर रहे हैं और डैंड्रफ की प्रॉब्लम ने आपको परेशान कर रखा है तो राई का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद रहेगा। चाहें तो राई को रातभर भ...

गद्दार का हाल

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ये महल जिसके खण्डरात की तस्वीर आप देख रहे हैं ,आज से तीन सौ साल पहले ये बेहद  खूबसूरत और बड़ा महल हुआ करता था लेकिन जैसे ही इस महल का मालिक मरा इसके बाद किसी ने इस महल में आबाद होने की कोशिश न कि ,लोगों को इस महल से बहुत ज्यादा नफरत थी , और तीन सौ साल गुजरने का बाद भी इस महल या इस महल के मालिक के लिए लोगों के दिलों से नफरत कम न हुई , इंसानों की तारीख़ में ये पहली इमारत है जिससे नफरत भरी निगाह से देखी जाती है , तारीख़ ने जिस तरह इसे याद रखा उस्से ये साबित होता है के गद्दारी एक ऐसा जुर्म जिसे दुनिया कभी माफ नहीं करती , और मजे की बात ये है कि इस गद्दार शख्स ने जिन लोगों के लिए अपनी क़ौम अपने मुल्क से गद्दारी की उन्ही लोगों ने इसे तारीख़ का सबसे बड़ा गद्दार क़रार दिया ,उसके महल को गद्दार महल का नाम दिया । पता है वो शख्स कौन था  वो शख्स "मीर जाफर" था और उसका ये खण्डर नुमा महल आज भी पक्षिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के मक़ाम पर है , गद्दार गद्दारी कर जाते हैं, लेकिन तारीख उन्हें माफ़ नहीं करती , उनको इबरत का निशान बना दिया जाता है!!!

ग्रीन टी के फायदे

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ग्रीन टी वसा को शरीर से निकालने में मदद करती है।इम्युनिटी को बढ़ाती है। भूख शांत करती है जिससे आप कभी भी कुछ भी नही खाने लगते हो। कई शोध में पाया गया कि इसमे दालचीनी काली मिर्च, अदरक, मुलेठी मिलाकर पीने से छोटे मोटे ज़ुकाम से लेकर कैंसर तक को रोकने की शक्ति देती है।नवीनतम शोधकर्ताओं ने प्रमाणित किया है ग्रीन टी में एन्टी ऑक्सीडेंट का पर्याप्त समावेश होता है जो मानव शरीर को दीर्घायु प्रदान करता है। पोस्ट कैसी लगी कमेन्ट ज़रूर करें।