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गिलोय

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गिलोय   अमृता  (Tinospora_cordifolia) गिलोय ही एक ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। गिलोय (अंग्रेजी:टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) (अन्य नाम - गुच्छ) की एक बहुवर्षिय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। आयुर्वेद में इसको कई नामों से जाना जाता है यथा अमृता,गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी, आदि। 'बहुवर्षायु तथा अमृत के समान गुणकारी होने से इसका नाम अमृता है।'  इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं।  आइए जानते हैं गिलोय के फायदे गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी सिस्टम) गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिय...

मूली - बवासीर का इलाज चुटकियों में

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मूली मूली बहुत गुणकारी और उपयोगी होती है । यहां मूली के गुण एवं उपयोग के विषय में विवरण किया जा रहा है । प्रायः मूली को साधारण वस्तु समझा जाता इसलिए इसका उपयोग यदाकदा सलाद के रूप में कर लिया जाता है । मूली का उपयोग खाद्य व्यंजन में तो किया जाता है साथ ही इसका प्रयोग इलाज औषधि के रूप में भी किया जा सकता है इसका अचार बहुत स्वादिष्ट और गुणकारी होता है । गुण- मूली चरपरी गरम , रुचिकारक , हलकी पाचक , त्रिदोषनाशक स्वर को उत्तम करने वाली तथा ज्वर , श्वास कष्ट , नासिका , कण्ठ रोग तथा नेत्र रोग नाशक है । यह छोटी मूली के गुण बड़ी मूली के गुण भी ऐसे ही होते सिर्फ एक फर्क होता है कि बड़ी मूली पचने में हलकी नहीं , भारी होती है । मूली उष्णवीर्य और तिक्तरस वाली होती है , तीखी , सारक , कृमिनाशक(पेट के कीड़ों को खत्म) और अग्निवर्द्धक होती है । खाने को हजम कर देती और खुद देर हजम होती है । मूत्र विकार और उदर विकार करती है । परिचय - पह छोटी  व बड़ी , दो प्रकार की होती है और सारे भारत में पाई जाती है अतः इसका परिचय देना जरूरी नहीं । उपयोग - मूली का ज्यादातर उपयोग सलाद के साथ कच्चे रूप में कि...

आलू बुखारा

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आलूबुखारा : रसीले फल के Health Benefits आपको चकित कर देंगे   1 आलूबुखारे के 100 ग्राम में लगभग 46 कैलोरी होती है। अत: इसमें अन्य फलों की तुलना में कैलोरी काफी कम पाई जाती है। इस कारण से यह आपका वजन नियंत्रित करने में भी बेहद सहायक होता है। 2 आलूबुखारे में सैच्युरेटेड फैट या संतृप्त वसा बिल्कुल भी नहीं होता, जिससे इसे खाने के बाद आपको पोषक तत्व भी मिलते हैं और वजन भी नहीं बढ़ता। 3 आलूबुखारा डायट्री फाइबर से भरपूर होता है, जिसमें सार्बिटॉल और आईसेटिन प्रमुख हैं। खासतौर पर यह फाइबर्स, शरीर के अंगों के क्रियान्वयन को सरल बनाते हैं, और पाचन क्रिया को भी दुरूस्त करते हैं। 4 आलूबुखारे का प्रतिदिन सेवन आपको कब्ज‍ियत से राहत दिलाने में मदद करता है साथ ही पेट साफ करने में भी मदद करता है। 5 आलूबुखारे में उपस्थित विटामिन-सी आपकी आंखों और त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक है, और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। इसके इलावा इसमें विटामिन-के एवं बी 6 भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। 6 यह रक्त का थक्का बनने से रोकता है, जिससे ब्लडप्रेशर और हृदय रोगों की संभावना कम होती है। इसके साथ ही ...

पानी की कमी से होने वाली परेशानियां

शरीर में पानी की कमी पर दिखते हैं ये 5 लक्षण, हो जाएं सतर्क शरीर में पानी की कमी होने पर कई सारी समस्या होने लगती है। बारिश हो या सर्दी, शरीर में पानी की कमी होने पर आपको अजीब सी छोटी-छोटी बीमारी होगी। जैसे - पेट गड़बड़ होना, पेट में से आवाज आना, लूज मोशन जैसा महसूस होना, खट्टी डकार आना। लेकिन इस तरह के लक्षण दिखने पर उन्हें हल्के में नहीं लें। तो आइए जानते हैं कौन से 5 लक्षण है जो आपको बुरी तरह से प्रभावित करते हैं... - अधिक भूख लगना। - पीली यूरिन आना। - सांसों में से बदबू आना। - थकावट महसूस होना। - सिरदर्द की शिकायत होना। वहीं अब जानते हैं शरीर में पानी की कमी होने से शारीरिक समस्या कौन सी हो सकती है - - सिरदर्द होना। - कब्ज की शिकायत। - ड्राई स्किन। - बीपी कम होना। - किडनी की बीमारी का खतरा। यह लक्षण सामान्‍य या मामूली दिख सकते हैं लेकिन नजरअंदाज करने पर आपको भारी पड़ जाएंगे। इसलिए पानी अवश्य पीयें

सैक्स करने के बाद क्या करें!!!

संभोग के बाद क्या करे?  मर्दो....अगर आप चाहते हैं कि स्त्री न केवल शारीरिक रूप से शांत सेक्स से, बल्कि नैतिक रूप से, मानसिक रूप से भी अच्छा महसूस करे, तो संभोग पश्चात उसके साथ थोड़ी देर के लिए गले मिलें।  trust me, संभोग करके पैंट पहनकर वहां से खाने के लिए जाने या सोने के लिए मुँह फेरना से बुरा कुछ नहीं है।   उसके साथ लेट जाओ, सुखद चीजों के बारे में बात करो, इससे उसकी फिर से आपके साथ "करने" की इच्छा बढ़ेगी जीवन एक है, पत्नी एक है, उसके साथ खूब आनंदित होइए  सेक्स का विज्ञान

लिकोरिया

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ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) के लक्षण  कारण,  घरेलू उपचार  और परहेज  ल्यूकोरिया (Leucorrhea)  लिकोरिया (Likoria) नाम से भी पुकारा इस बीमारी में योनि से चिपचिपा, दुर्गन्धयुक्त, गाढ़ा पानी बहता है। जब यह बीमारी किसी महिला को होती है, तो महिला लज्जावश शुरुआत में ल्यूकोरिया के बारे में किसी को नहीं बताती है। नतीजन यह होता है कि बीमारी और बड़ी हो जाती है। जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। हमारा सामाजिक ताना बाना इसे ज़्यादा जटिल बना देता है।  ल्यूकोरिया के इलाज के कई सारे घरेलू उपाय हैं, जिनका उपयोग कर आप ल्यूकोरिया का इलाज कर सकती हैं।आयुर्वेद में ल्यूकोरिया को श्वेत प्रदर कहा जाता है। इसे एक स्वतंत्र रोग ना कहकर योनि के विभिन्न रोगों का लक्षण कहा गया है। जो महिलाएं अस्वस्थ आहार, अधिक नमकीन, तीखा,खट्टे, चटपटे, चिकने तथा मांस-मदिरा का अधिक सेवन करती हैं, उनको ल्यूकोरिया होने की संभावना बढ़ जाती है।  ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) क्या है?  ल्यूकोरिया को सामान्य भाषा में सफेद पानी या श्वेत प्रदर भी कहा जाता है। यह स्त्रियों में होने वाली एक आम बीमारी है। इसमे...